स्तिर हस्तक - हत्सक का व्याख्यान और कथक के व्याख्यान कथक के प्रारंभिक पाठ्य क्रम के लिए ।
गुरु स्तिर की महत्वता को मुद्राओं द्वारा अपने शिष्य और शिष्याओे को इस पाठ्य क्रम में संझा रहीं हैं । स्तिर का मतलब होता है कि एकाग्रित होकर एक जगह पर स्थिर रहना । ना हिलना, ना खुलना । इस मुद्रा में साँसों का चलन भी संतुलित अन्ताज़ में करना होता है । गुरु ने स्थिर की मुद्रा को संझाते हुए अपनी शिष्य और शिष्याओं को इसकी महत्वपूर्णता और सही तकनीक के बारे में बताया है ।
कथक क्या है ? कथक में घरानों का क्या महत्व है और भारत में कथक का इतिहास तथा उसकी विधियाँ किस प्रकार हुई ?
गुरु वंदना व्याख्यान क्रम से (पाठ १) | कथक में गुरु वंदना श्लोक का विस्तृत विवरण|
चक्कर : हस्तक का प्रदर्शन शिष्याओं के साथ । Chakkars Demonstration with the Students Hastaks
आलिंगन की आमद प्रदर्शन शिष्यों के साथ | Aalingan Ki Amad Demonstration with the Students
चौगुन का प्रदर्शन शिष्याओं के साथ - तत्कार (पैरों का काम) - तीनताल | Chaugun Demonstration with the Students